Monday, January 22, 2018

dev prayag

धार्मिक दृष्टि से पांच पवित्र प्रयाग मशहूर हैं। देव प्रयाग उनमें से एक हैं।
देव प्रयाग पावन नदियों भागीरथी और अलकनंदा के संगम पर बसा है ।
देव प्रयाग में भागीरथी - अलकनंदा संगम के बाद इस पावन जलधारा को मां गंगा के नाम से जाना जाता है।
देव प्रयाग में संगम के बाद गंगा बनी ये पावन जलधारा आगे ऋषिकेश और हरिद्वार पहुंचती हैं ।
देव प्रयाग के आगे 4 अन्य प्रयाग- विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग हैं।
देव प्रयाग में एक प्राचीन मंदिर है। भगवान राम के इस मंदिर को रघुनाथ मंदिर कहते हैं।
रघुनाथ मंदिर की महिमा को बखान करता ये शिलालेख मंदिर परिसर में ही मौजूद है।
देव प्रयाग में एक नक्षत्र वेधशाला एवं ज्योतिष शोध केंद्र भी है। इसकी स्थापना पं.चक्रधर जोशी ने की
स्व.पं.चक्रधर जोशी एक राष्ट्रीय ख्याति के ज्योतिषाचार्य और खगोलशास्त्री थे ।
इस वेधशाला में कई विषयों की दुर्लभ पुस्तकें एवं पांडुलिपियां रखी हुई हैं ।
अखबारों के बड़े पुराने संस्करण भी यहां हैं।
ज्योतिष और खगोल विज्ञान की दुर्लभ पुस्तकों का यहां बेहद दुर्लभ खजाना है । ये ज्ञान का भंडार है।