मेहनताना दो मंत्री जी !!

मोदी 2.0 सरकार के एक मंत्री की ओर से हो रहा पत्रकारों का शोषण                                                       

                                                         डिस्क्लेमर
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ये कहानी पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित है । सभी पात्र असली हैं सिर्फ उनके वास्तविक नामों को बदल दिया गया है। इस कहानी का उद्देश्य किसी की मानहानि करना नहीं है । इस कथा को सिर्फ इसलिए लिखा गया है ताकि मंत्री जी की नाक के नीचे चल रहे शोषण को खत्म किया जा सके और जो लोग उनके लिए काम कर रहे हैं तथा जो कर चुके हैं, उनके वेतन,भत्ते,बकाया समय से अदा किये जाएं। अमानवीय सेवा शर्तों की समाप्ति हो और श्रमिक कानूनों के तहत ही काम करने वालों से काम लिया जाए न कि लोगों की विवशता का लाभ उठाते हुए उनका शोषण हो। इससे पहले कि इस कहानी को शुरु किया जाए पाठकों को पात्रों से परिचित करवा देते हैं । जाहिर है मंत्री जी या कथा के किसी पात्र की ओर से लेखक या वेबसाइट के खिलाफ कोई वैधानिक कार्रवाई न हो सके इसलिए पात्र परिचय समेत पूरी कथा की लेखन शैली को सांकेतिक रखा गया है। हालांकि लेखन शैली में बरती जा रही ये सतर्कता अवैधानिक प्रकार के रिएक्शन के मामले में सुरक्षा की गारंटी नहीं है । सो इसके कहानी को लिखने के बाद मैं महामृत्युंजय का जाप करना शुरु कर रहा हूं ।  

पात्र परिचय -

माननीय मंत्री जी - इस कहानी के लीड हीरो (?) माननीय मंत्री जी हैं । मंत्री जी बड़े पढ़े-लिखे और काबिल शख्स हैं। वे सोशल मीडिया पर भयानक सक्रिय रहते हैं। वो दीगर बात है कि ये काम उनके लिए सोशल मीडिया की एक टीम दिन रात पिसकर करती है । मंत्री जी को पेशेवरों और अपनी सेवा में लगे पत्रकारों की कोई कद्र हो न हो लेकिन मुझे ये लिखते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि वे अपने कुत्तों को बेहद प्यार करते हैं । इतना प्यार करते हैं कि कुत्तों की तारीफ में एक लिखाड़ किस्म के सीनियर पत्रकार से लिखवाये गये एक फेसबुक पोस्ट को भी मंत्री जी ने 3 बार री राइट करवा डाला और फिर भी वे संतुष्ट नहीं हुए ।

एक बेहद छोटी सी लोकसभा सीट से जीतकर आने वाले मंत्री जी सच्चे पशु प्रेमी हैं । इतने ज्यादा कि अपने सरकारी बंगले के भीतर चलवाये जा रहे निजी सोशल मीडिया ऑफिस की दीवार पर उनकी अपने प्रिय कुत्ते के साथ तस्वीर टंगी है। हांलाकि आमतौर पर होता तो ये हैं कि केंद्रीय मंत्रीगण अपने बंगले में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के साथ खिंची तस्वीरें लगाते हैं । खैर छोड़िये जिसकी जिस पर आस्था । हम क्या कर सकते हैं ? आइये आगे चलते हैं कहानी के दूसरे लेकिन बेहद अहम पात्र के परिचय की ओर ।  
      
 
                                                              
मैडम एक्स - ये मंत्री जी के निजी सोशल मीडिया ऑफिस की अधिष्ठात्री देवी हैं । जैसे देवी-देवताओं को कोई साक्षात नहीं देख पाया लेकिन वे समस्त प्राणियों के सभी गतिविधियां जानते हैं लगभग उसी तर्ज मैडम एक्स के भी दर्शन दुर्लभ हैं लेकिन वे ऑनलाइन माध्यमों से सारे सोशल मीडिया ऑफिस की खबर रखती हैं। देवी -देवताओं के जैसे गण या भैरव होते हैं ठीक उसी तर्ज पर मैडम के भी गण और भैरव ऑफिस में मौजूद हैं । इन्हें आप "अय्यार" भी कह सकते हैं जो पल पल की खबरें मैडम तक पहुंचाते रहते हैं। मैडम एक्स का मुख्य शौक सोशल मीडिया ऑफिस में काम करने वाले लोगों को उनकी शक्ति की अंतिम बूंद तक निचोड़ कर काम करवाना है । अगर काम न हो, तो भी, मैडम एक्स किसी भी शख्स के 12 घंटों से अधिक काम कर लेने के बाद भी घर चले जाने की बात पर नाखुश हो जाती हैं।

12 घंटे से अधिक की मजदूरी करने के बाद अगर कोई पेशेवर घर पहुंचा ही हो और दुर्भाग्यवश कोई बेहद टुच्चा सा काम मैडम के दिमाग में आ जाए तो बस उस बेचारे कर्मचारी की खैर नहीं । मैडम तुरंत फोन करके उस पेशेवर की क्लास ले लेती हैं । "तुम घर कैसे चले गये , क्या तुमको नौकरी नहीं करनी है ? " अगर कोई बीमार होने या किसी वाजिब कारण से ऑफिस नहीं आ सका तो भी मैडम की घुड़की उसे नौकरी से निकाल देने की होती है । मैडम एक्स किस हैसियत से मंत्री जी के निजी सोशल मीडिया ऑफिस की मुखिया हैं ? ये कोई नहीं जानता । उन्हें कोई सरकारी नियुक्ति मिली है या मंत्री जी की व्यक्तिगत पसंद हैं ? कुछ ठीक से कहा नहीं जा सकता । मैडम एक्स एक जमाने में एक निजी चैनल की मुखिया थीं । उनके पूर्व पति एक मशहूर घोटाले में फंसे हुए थे । मैडम एक्स का अतीत कुछ विवादित तथ्यों की मिली-जुली दास्तान है ।


चाचा - मैडम के भयानक स्तर वाले यस मैन । चाचा , मंत्री जी के यहां कई साल से डटे हुए हैं । सरकारी कर्मी नहीं हैं लेकिन बंधुवा मजदूरी करने को अपना सौभाग्य समझते हैं । मंत्री जी और मैडम के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को हमेशा तैयार । शायद चाचा के डैडीकेशन से ही प्रेरणा लेकर भारतीय दूरसंचार विभाग ने अपनी टैग लाइन - " अहर्निशं सेवामहे " अर्थात् " दिन रात सेवारत " , तय की होगी। खैर इनकी और ज्यादा क्या बात करना....टाइम वेस्ट होगा ।


उभय कुमार – मैडम एक्स जब एक निजी चैनल की मुखिया थीं तब से उभय कुमार उनके दाहिने हाथ और लेफ्टिनेंट रहे हैं । उभय और चच्चा में हमेशा कंपटीशन रहता है कि मैडम के लिए जान न्योछावर करने में कौन आगे रहता है । उभय , मूल रूप से तो पत्रकार है लेकिन मंत्री जी के सोशल मीडिया ऑफिस का कारिंदा बनने के बाद से वो शेरा वाली माता के शेर की तरह की मैडम एक्स का वाहन बना हुआ है । उभय भी उतना ही घर गृहस्थी के बोझ तले दबा होने के कारण विवश है जितना उस दफ्तर में काम करने वाला हर शख्स । हां उभय औरों के मुकाबले मैडम एक्स का ज्यादा बड़ा सेवादार है ।
 
     
 
लंदन वाले पंडित जी – ये वरिष्ठ और बड़े सौम्य पत्रकार हैं । कई भारतीय न्यूज चैनलों में सेवाएं देने के बाद लंबा समय विदेशों में पत्रकारिता करते हुए बिता चुके हैं । पारिवारिक दायित्यों से विवश होकर स्वदेश लौटना पड़ा और बेचारे सीधे मंदी की मार झेल रहे देसी मीडिया के दलदल में लैंड हुए ।  

मनोरंजन जी – अच्छे शख्स, अच्छे पत्रकार । समस्या इनके साथ भी वही थी मंदी की मार से पैदा विवशता लेकिन स्वभाव के खरे । ये भी बेचारे पिंजरे में कैद शेर जैसे ही थे ।

शिव शंकर जी – तकरीबन 25 साल से पत्रकार हैं । स्वभाव बेहद तीखा , अच्छे लिखाड़ । लंदन वाले पंडित जी और मनोरंजन जी के अच्छे मित्र । इनकी दिक्कत ये है कि कहीं भी ये व्यवस्था से जुड़ी कमियों के खिलाफ सबसे पहले और जोरदार ढंग से खड़े हो जाते हैं । आज के मंगल पांडे समझिये इन्हें ।

लक्ष्मी नारायण जी – मैडम एक्स के सबसे खास ‘अय्यार’ । मैडम एक्स को ऑफिस की खुफिया खबरें पहुंचाने के मामले में ये बेजोड़ हैं । विश्व विख्यात खुफिया एजेंसियां सीआइए,एम आई-6, मोसाद,आईएसआई और रॉ भी इनसे कुछ सीख सकती है । मंत्री जी के सेवकों को मिले कमरों में से एक में ही इनका स्थायी वास है । लिहाजा वे कब ऑफिस ड्यूटी पर हैं और कब घर पर इसका पता तो साक्षात सृष्टि चलाने वाले बैकुंठ स्वामी भगवान लक्ष्मी नारायण भी नहीं बता सकते ।  


ये तो रहा पात्र परिचय आइये अब कहानी को आगे बढ़ाते हैं-
    
      
 
कुछ ही महीनों पहले की बात है जब इस कहानी के लेखक दिल्ली के राजीव चौक स्टेशन पर करीब रात 11.30 बजे अपने घर जाने के लिए मेट्रो की प्रतीक्षा कर रहे थे । भीड़ नाममात्र की थी लिहाजा कोई आपाधापी नहीं थी । तभी सामने से 4 लोग एक साथ तेज चाल से ठीक उसी स्टेशन पर आते हैं जहां लेखक पहले से खड़े थे । अचानक सभी की नजर एक दूसरे पर पड़ती है और सुखद आश्चर्य ये था कि सभी पत्रकार बंधु एक दूसरे को पहचानते हुए गर्मजोशी से मिलने लगते हैं । उभय,लंदन वाले पंडित जी,मनोरंजन जी ,शिवशंकर जी और लेखक के बीच अभिवादन और मुस्कुराहटों का आदान-प्रदान होता है । बस मनोरंजन जी और लेखक का मिलना पहली बार हुआ था । ये दोनो पूर्व परिचित नहीं थे ।

सभी लोग आपस में बातें करने लगते हैं । इस बीच कहां रहे ? आज कल कहां हो? और बीते दिनों की यादें ताजा होनी शुरु ही हुईं थी कि तभी मेट्रो ट्रेन स्टेशन पर आ गई । सभी का गंतव्य एक निश्चित दूरी तक समान था । सो बातें जोर पकड़ने लगीं ।  
              
मित्र मंडली के सदस्यों ने लेखक को बताया कि वे सभी आजकल एक केंद्रीय मंत्री जी के निजी सोशल मीडिया दफ्तर में कार्यरत हैं । मैने सभी को बधाई दी क्योंकि मीडिया मंदी के दौर से गुजर रहा है और ऐसे में प्रतिष्ठित जगह पाना वाकई काबिले तारीफ है । बधाई खत्म भी ठीक से नहीं हो पाई थी कि मित्र मंडली का दर्द जुबां से फिसलने लगा । बातों से पता चला कि मैडम एक्स के पुराने वफादार उभय कुमार जी को यहां सबसे पहले काम करने का अवसर मिला था और वे भी अपने बाकी साथियों को बारी-बारी वहां काम दिलाने में कामयाब रहे थे ।

अब यहां से खेल उलझा सा नजर आने लगा । लंदन वाले पंडित जी बोले की भाई ये काम है तो अच्छा और मंत्री जी के नियंत्रण वाले विभागों से कुछ समय में अस्थाई सरकारी नियुक्ति भी हो जाएगी लेकिन ये सब होने में करीब 4 माह का वक्त लगेगा । मैं हैरानी में पड़ गया । मैने पूछा कि तब तक क्या होगा – आप लोगों के घर कैसे चलेंगे बिना वेतन, ऊपर से रोज आने जाने के खर्च तथा कम से कम एक वक्त का बाहर खाना और चाय,सिगरेट आदि का खर्च क्या आप लोग अपने पास से कर रहे हैं ? इस पर मनोरंजन जी ने कहा- जी हां ।
      
इसी बीच शिवशंकर जी भी विकल होकर बोल पड़े यही तो रोना है । एक तो गरीबी ऊपर से आटा गीला । हर महीने के कम से कम 7 हजार का तो खर्चा अपने पास से करना पड़ रहा है यहां नौकरी करने के लिए । उभय कुमार बीच में ही बोल पड़े – अरे कुछ दिन की बात है , सब ठीक हो जाएगा । सरकारी काम है –कुछ वक्त तो लगता ही है । इस पर लेखक ने असहमत होते हुए कहा कि वो तो ठीक है भाई साहब लेकिन जिन 3 विभागों के आका खुद मंत्री जी हैं उनसे 4 लोगों की अस्थायी नियुक्तियां करवाने में देर लगने का क्या तुक है ? ये काम तो ब मुश्किल एक सप्ताह में खत्म हो सकता है । आखिर आप लोग ठहरे मंत्री जी के निजी स्टाफ की हैसियत वाले लोग । इस पर सबकी प्रश्नवाचक निगाहें उभय कुमार की तरफ उठ गयीं । उभय अचकचाते हुए बोले – अरे यार दरअसल 12 से 15 घंटे रोज की नौकरी है ऊपर से किसी भी प्रकार की कोई छुट्टी नहीं है । मंत्री जी को अगर छींक भी आ गई तो समझो शामत । न जाने कितने घंटे लगातार काम करना पड़ जाए । ऐसे में कोई पत्रकार यहां टिकता ही नहीं है । बंधुआ मजदूर या खच्चर जैसा बर्ताव किया जाता है यहां । लिहाजा लोग टिकते ही नहीं हैं ।

इसका क्या मतलब हुआ ? मैने एतराज करते हुए बोला ? मंत्री जी क्या आप लोगों से बंधुआ मजदूरी करवाएंगे ? कानून नाम की चीज है या नहीं ? संघ के मंत्री हैं और अपने ही बंगले में पत्रकारों को बैठाकर उनका शोषण करेंगे । मेरी बातों में रोष था । इस पर लंदन वाले पंडित जी बोल पड़े – मुझे तो लगता है कि पहले चच्चा फिर मैडम एक्स और बाद में मंत्री जी के एक और सरकारी पीए ही हम लोगों के नियुक्ति प्रस्तावों को महीनों तक रोक कर रखते हैं ताकि पत्रकार लोग अस्थायी सरकारी नौकरी के लालच में शोषण करवाते रहें और अगर छोड़ कर चले जाएं तो कोई देनदारी ही न बने । शिवशंकर भी बीच में बोल पड़े – और नहीं तो क्या ? यही हो ही रहा है । वर्ना मजाल है मंत्रालय की जो मंत्री जी के निजी स्टाफ की अस्थायी नियुक्ति में देर कर सके । मनोरंजन जी ने भी तपाक से हां में हां मिलाई । इस पर उभय असहज हो गये बोले अरे ऐसा नहीं है भाई ।
  
         

आखिर उभय ठहरे मैडम एक्स के चाटुकार , सो शोषण वाली बात पर साथ नहीं आए । इस पर शिवशंकर जी बोल पड़े – भाई साहब और छोड़िये , जरा ये तो बताइये कि मेरे प्रस्ताव का क्या हुआ । आपने उसे फॉरवर्ड किया या नहीं ? मुझे काम करते हुए 20 दिन हो चुके हैं और मुझे तो लगता है कि मेरे प्रस्ताव को अभी तक आपने ही आगे नहीं बढ़ाया , शिवशंकर ने क्षोभ भरे लहजे में कहा । इस पर उभय डिफेंसिव होकर कहने लगे – सभी के प्रस्ताव एक साथ भेजूंगा,रुक जाइये । लंडन वाले पंडित जी ने बेसब्र होकर कहा कि – भाई साहब दूसरों की क्या शिकायत करना जब आप अपने और साथी पत्रकार होकर भी उन शोषण करने वालों का साथ दे रहे हैं ? इस बीच सभी को भूख और नींद सताना शुरु हो चुकी थी और मेट्रो भी गंतव्य के काफी नजदीक पहुंच चुकी थी । इन सारी बातों का लब्बो लुबाब मैने मन में निकाला तो सिहर उठा कि कैसे उभय जैसा एक सीनियर पत्रकार अपनी नौकरी पक्की करने के लिए और मैडम एक्स का कृपा पात्र बनने के लिए अपने साथी पत्रकारों को शोषणकारी सिस्टम में झोंक रहा है और खुद भी उनके शोषण में लगा है । मैं पत्रकारिता की बुरी दशा देख कर दुखी और चुप सा हो गया कि कैसे इतने वरिष्ठ पत्रकारों को एक कैबिनेट मंत्री और उसके चमचे नोंच खसोट रहे हैं । उनके साथ पशुओं जैसा बर्ताव कर रहे हैं और वो भी बिना पैसों के और अस्थायी सरकारी नौकरी का गाजर दिखाकर ।



इस बीच यमुना बैंक स्टेशन आ गया और लंदन वाले पंडित जी और मनोरंजन जी ने हमसे विदा ली । गाड़ी के फाटक फिर से बंद हो गये और मैं, शिवशंकर जी , उभय जी आगे के सफर को जारी रखे रहे । ये सारे वृतांत को सुनने के बाद मेरा मन अंदर ही अंदर रो रहा था । मैं भी एक पत्रकार हूं और कैरियर में उतार-चढ़ाव देखता रहा हूं लेकिन ये सारे मेरे प्यारे साथी कितनी बड़ी मुसीबत और शोषण झेल रहे हैं ,वह बहुत दुखद है । मन ही मन पत्रकारिता को लानत भेजने लगा । महीनों से ये कहानी सबके सामने लाना चाहता था लेकिन साथियों की बदनामी होगी , सीनियरों की इज्जत समाज और पत्रकार जगत में धूल में मिल जाएगी , ये सोच कर बार बार रुक जाता था । यही सब सोचते –सोचते करीब 3 माह बीत गए ।                                                                                                                            
                                                                    
हाल ही में एक दिन सुबह अचानक मनोरंजन जी का फोन आया । वे बोले भाई साहब आप तो अपनी वेबसाइट चलाते हैं क्या हम लोगों की दास्तान नहीं लिख सकते । इस पर मैने उनसे अपनी उहापोह बताई तो वे बोले सही को सही और गलत को गलत कहने में हम पत्रकारों को अगर डर लगने लगा तो सच समझिये हम उस दिन वाकई मर चुके होंगे । आप तो लिखिये – मैं आपको आज तक के सारे अपडेट और अंतर कथाएं बताता हूं । इस पर मैने हां कर दी ।

अब मनोरंजन जी ने बोलना शुरु किया । उन्होंने बताया कि जिस दिन आप मेट्रो में मिले थे उसके कुछ ही दिन बाद शिवशंकर जी मंत्री जी का सोशल मीडिया ऑफिस छोड़ कर चले गये । उनका बकाया भी उन्हें नहीं मिला है ।  इस पर मेरा मन फिर से दुखी हो गया ।


मनोरंजन जी ने आगे बताया कि – मैडम एक्स के बेहूदा ढंग से बात करने और असभ्य बर्ताव से नाराज होकर लंदन वाले पंडित जी ने भी काम पर आना बंद कर दिया । उनका भी बकाया सोशल मीडिया ऑफिस वालों ने मार दिया । मेरा क्षोभ और बढ़ गया । मैने पूछा – आप अभी तक कार्यरत हैं या नहीं ? मनोरंजन जी बोले – नहीं भाई साहब । करीब 2 महीने तक काम करने के बाद मेरी भी एक दिन बहस हो गई और मैंने भी काम पर जाना बंद कर दिया है । मेरा भी बकाया नहीं मिला । उन्होंने आगे बताया कि – मैडम एक्स से फोन करके बकाया मांगा तो वे बोलीं जो तुम्हें लाया है उससे मांगो । जब उभय कुमार को फोन करता हूं तो वे टाल-मटोल करते हैं और अब उन्होंने मेरा फोन भी उठाना बंद कर दिया है ।

मनोरंजन जी ने कहा कि – मैने मंत्री जी से एक दिन जनता दरबार में भेंट करके उन्हें अपना शिकायती पत्र सौंपा है और उन्हें पूरा माजरा बता दिया है । इस पर मैं खुश होकर बोला –वाह !! आपने शानदार कदम उठाया । मैने कहा कि क्या मंत्री जी ने सभी का वेतन दिलवाने की बात कही है ? तो मनोरंजन जी बोले- नहीं , मंत्रीजी ने चच्चा से कहा है कि इस पूरे मामले की जांच करके मुझे रिपोर्ट दो । मैं फिर से मायूस हो गया । गई भैंस पानी में ,मैने कहा । मनोरंजन जी बोले – जी भाईसाहब , अब देखिये क्या होता है ? रिपोर्टों का क्या भरोसा , न जाने कितने वर्षों में आएंगी ? और आएंगी भी कि नहीं ? मैने कहा – सही कह रहे हैं आप ।                                                                                                                                         
  
                 

मनोरंजन जी ने जवाब दिया – इस बात को भी करीब महीना बीतने वाला है लेकिन मुझे या किसी अन्य साथी को मंत्रीजी के कार्यालय से कोई फोन नहीं आया और न ही चच्चा ने मुझसे कोई बात की । वेतन मिलना तो दूर की बात है । मंत्री जी ने बकाया मांगने वालों को अपने बंगले में घुसने से भी अब रुकवा दिया है । इस पर मैं बोल पड़ा कि किसी केंद्रीय मंत्री के पास इतना वक्त कहां कि इस मामूली बात की प्रगति रिपोर्ट के बारे में याद रखे या चच्चा से दोबारा पूछे कि पत्रकारों के वेतन भुगतान का मसला सुलझा या नहीं ? मनोरंजन जी बोले – सही कहा आपने । क्षण भर की खामोशी के बाद एकाएक मनोरंजन जी बोले – अरे आपको मामूल है कि उभय जी भी मैडम एक्स की तानाशाही से तंग आकर काम पर जाना बंद कर चुके हैं और अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं ।

मैं आश्चर्य से बोला – क्या ? ये कैसे हुआ ? इस पर मनोरंजन जी ने एक शोषण की संक्षिप्त कथा सुनाई और हम जोर से हंसे । ठहाके के बाद मैने पूछा कि – जब नियुक्ति ही नहीं हुई तो इस्तीफा कैसा ? तो मनोरंजन जी बोले कि उभय की नियुक्ति कुछ ही दिन पहले हो गई थी । फिर भी वह तंग आकर भाग खड़े हुए । मैने ठंडी सांस भरकर कहा कि चलो जो उभय ने दूसरों के साथ किया वही जल्द ही उनके सामने भी आ गया । मनोरंजन जी मुझसे सहमत थे । उन्होंने मेरी बात में जोड़ते हुए कहा कि और जो मैडम एक्स ने हम लोगों के साथ किया वो उनके सामने आएगा ।
 
   
वैसे भी एक राष्ट्रीय स्तर के मशहूर घोटाले से संबंध रखने के कारण पहले ही जेल जा चुकी मैडम एक्स के साथ इससे बुरा और हो भी क्या सकता है ? मनोरंजन ने कहा । इस पर मैने कहा – ये आपने अभी क्या कहा ? ये बात आपने पहले कभी नहीं बताई ? इस पर मनोरंजन जी बोले – इसमें बताने जैसा क्या है ? मैडम एक्स का नाम गूगल पर डालिये और खुद सब कुछ पढ़ लीजिए । सब कुछ तो पब्लिक डोमेन में है । मैने फटाफट गूगल किया तो पाया कि वाकई मनोरंजन जी बिल्कुल सही कह रहे हैं ।

मैं हैरत में पड़ गया कि एक दागदार शख्स को मंत्रीजी अपने सोशल मीडिया का मुखिया भला कैसे बना सकते हैं ? ये सरकार तो भ्रष्टाचार मुक्त होने की बातें करती है । खैर हम मामूली लोग कर भी क्या सकते हैं ? हां जो एक पत्रकार कर सकता है , वो मैं कर रहा हूं कि इस पूरी कथा को पब्लिक डोमेन में ला रहा हूं । शेष जैसा जनता जनार्दन उचित समझे । इसी के साथ मनोरंजन जी और मेरा फोन पर संवाद समाप्त हुआ । अब ये सत्य कथा आप पाठकों के हवाले है ।
            
   

          



Comments ( 5 )

  • नवीन कुमार

    ये बहुत दुखद मामला है । लेखक को उस मंत्री का नाम सार्वजनिक करना चाहिए ।

  • शारदा शुक्ला

    चिराग तले अंधेरा कहावत चरितार्थ हो रही है। बड़ी बड़ी बातें करने वालों की असलियत उजागर करनेवाला लेख

  • शारदा शुक्ला

    बेहतरीन, प्रभावशाली।

  • Rajan Jha

    माननीय मोदी जी के ये कैबिनेट मंत्री दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोये बैठे है।

  • ravi s

    वैसे भी एक राष्ट्रीय स्तर के मशहूर घोटाले से संबंध रखने के कारण पहले ही जेल जा चुकी मैडम एक्स के साथ इससे बुरा और हो भी क्या सकता है ? मनोरंजन ने कहा । इस पर मैने कहा – ये आपने अभी क्या कहा ? ये बात आपने पहले कभी नहीं बताई ? इस पर मनोरंजन जी बोले – इसमें बताने जैसा क्या है ? मैडम एक्स का नाम गूगल पर डालिये और खुद सब कुछ पढ़ लीजिए । सब कुछ तो पब्लिक डोमेन में है । मैने फटाफट गूगल किया तो पाया कि वाकई मनोरंजन जी बिल्कुल सही कह रहे हैं ।

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