PETA की हिमाकत !!!

भाई बहन का पवित्र त्यौहार रक्षा बंधन जहां, एक बहन अपने भाई की कलाई पर कलावा या फिर रंग बिरंगी राखी बांधती है और भाई इस राखी के बदले जीवन भर बहन की रक्षा का वादा करता है। हिन्दुओं में राखी का महत्व एक भाई बहन के पाक रिश्ते की गवाही देता है और उनको एक अटूट बंधन में जोड़ने का काम करता है।

लेकिन इस बार 3 अगस्त को होने वाले रक्षा बंधन से पहले जानवरों के वेलफेयर के लिए काम करने वाली संस्था पेटा-इंडिया ( People for the Ethical Treatment of Animals यानि PETA ) द्वारा जगह - जगह लगाए गए पोस्टर और होर्डिंग ने इस त्योहार को बदनाम करने की कोशिश की है।




माना पेटा इंडिया जानवरों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाता है और उनकी रक्षा के लिए काम करता है लेकिन रक्षा बंधन की राखी के साथ गाय की तस्वीर लगाकर चमड़े का उपयोग बंद करने की बात करना हास्यास्पद और एतराज की बात लगता है।  इस पोस्टर का मकसद गाय की रक्षा कम बल्कि हिन्दुओं के त्यौहार और मान्यताओं पर सवाल उठाना और उनको बदनाम करना ज्यादा दिखाई देता है।





गाय हिन्दुओं के लिए माता का एक रूप मानी जाती है और हर हिन्दू गौमाता में आस्था रखता है लेकिन रक्षा बंधन के साथ गाय की तस्वीर लगाकर चमड़े का उपयोग न करने की अपील, पेटा इंडिया द्वारा हिन्दू मान्यताओं व उनके त्यौहारों को बदनाम करने की साजिश भर नजर आता है।



भला रक्षाबंधन से गाय और लेदर को जोड़ने का क्या मतलब। क्या पेटा इंडिया वाले युगांडा से आये हैं या आपकी- हमारी तरह भारतीय ही हैं, इनको कोई बताएगा कि राखी कभी भी चमड़े की नहीं बनती। इतना सामान्य ज्ञान न होने का तो मतलब ही नहीं है, ये जानबूझकर बदनाम करने के लिए किया गया कृत्य लगता है।

पेटा इंडिया का मूल उद्देश्य जानवरों की रक्षा और उनके हक के लिए आवाज उठाना है, अगर वो वही करें तो बेहतर होगा, इस तरह किसी की मान्यताओं का मख़ौल उड़ाने का हक न उनको समाज देता है और न ही कानून। 


इस मामले में पेटा इंडिया को अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए कि उनका इस तरह के पोस्टर लगाने का असल मकसद क्या था, क्योंकि उस तरह के पोस्टर जानवरों की रक्षा के लिए लगाए गए हों यह, दिखाई तो नहीं देता।

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